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संपादकीय: लोकतंत्र की मजबूती के लिए जवाबदेह शासन और जागरूक नागरिक जरूरी

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धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, स्थानीय संपादक, बिहार की बात : लोकतंत्र केवल चुनाव कराने और सरकार बनाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी, संवैधानिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शासन की जवाबदेही पर आधारित व्यवस्था है। किसी भी लोकतांत्रिक देश की वास्तविक मजबूती इस बात से तय होती है कि वहां नागरिकों के अधिकार कितने सुरक्षित हैं, शासन कितना पारदर्शी है और आम आदमी की समस्याओं को कितनी गंभीरता से सुना जाता है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है। संविधान की प्रस्तावना में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श भारतीय लोकतंत्र की आत्मा हैं। इन आदर्शों को केवल संवैधानिक दस्तावेजों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभाव आम नागरिक के जीवन में भी दिखाई देना चाहिए। गरीब को न्याय, युवाओं को रोजगार, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिले, तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सार्थकता सिद्ध होगी। लोकतंत्र में सरकार की भूमिका जितनी महत्वपूर्ण है, उसकी जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचना, सार्वजनिक धन का उचित उपयोग, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण सुशासन के प्रमुख आधार हैं। जब किसी नागरिक को अपने अधिकार के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं या उसकी शिकायत लंबे समय तक अनसुनी रहती है, तब शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में शिकायतों का समयबद्ध निपटारा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसी प्रकार, लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल मतदान तक सीमित नहीं हो सकती। नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। मतदान करना, कानून का सम्मान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, सामाजिक सद्भाव बनाए रखना और भ्रामक सूचनाओं से बचना जिम्मेदार नागरिकता के महत्वपूर्ण पहलू हैं। जागरूक नागरिक ही शासन से उचित प्रश्न पूछ सकते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे सकते हैं। इस संदर्भ में स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। मीडिया जनता की समस्याओं को शासन तक पहुंचाने, प्रशासनिक कमियों को उजागर करने और जनहित के मुद्दों पर व्यापक चर्चा कराने का सशक्त माध्यम है। पत्रकारिता का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की अनावश्यक प्रशंसा अथवा आलोचना करना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर जनहित को सामने लाना होना चाहिए। समाचारों की सत्यता, निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखना पत्रकारिता की विश्वसनीयता के लिए अनिवार्य है। वर्तमान समय में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ भ्रामक सूचनाओं और अपुष्ट दावों की चुनौती भी गंभीर हुई है। बिना सत्यापन किसी सूचना को साझा करना सामाजिक तनाव, भ्रम और अविश्वास को जन्म दे सकता है। इसलिए नागरिकों और मीडिया संस्थानों, दोनों को सूचना की प्रामाणिकता के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए। स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी का निर्वहन ही लोकतांत्रिक समाज को स्वस्थ और मजबूत बनाता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, प्रशासन, मीडिया और नागरिक समाज अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें। लोकतंत्र किसी एक संस्था के प्रयास से मजबूत नहीं होता, बल्कि इसके लिए सामूहिक जिम्मेदारी, संवैधानिक मर्यादा और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है। सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना होगा कि जनता का विश्वास ही शासन की सबसे बड़ी पूंजी है, जबकि नागरिकों को भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बने रहना होगा। अंततः, लोकतंत्र की वास्तविक सफलता सत्ता की शक्ति में नहीं, बल्कि नागरिकों के विश्वास, अधिकारों की सुरक्षा और शासन की जवाबदेही में निहित है। जब संविधान के आदर्श व्यवहार में उतरेंगे, प्रशासन जनता के प्रति संवेदनशील बनेगा, पत्रकारिता निर्भीक होकर जनहित के प्रश्न उठाएगी और नागरिक अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे, तभी एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और सशक्त भारत का निर्माण संभव होगा।

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