विकाश गुप्ता (बिहार की बात)। मुजफ्फरपुर। लोकतंत्र के महापर्व में मतदान के प्रति उत्साह और अपने मताधिकार के इस्तेमाल का जज्बा ऐसा दिखा कि शारीरिक मजबूरियां भी रास्ता नहीं रोक सकीं। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में दिव्यांग मतदाता बैसाखियों के सहारे और परिजनों की मदद से मतदान केंद्र तक पहुंचे। उनके हौसले ने मतदान के महत्व को एक बार फिर सामने रखा।
हालांकि, मोतीपुर मतदान केंद्र पर दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां तीन मतदान केंद्र बनाए गए थे, लेकिन व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं होने के कारण चलने-फिरने में असमर्थ मतदाताओं को दूसरों की मदद लेनी पड़ी। बरूराज टोला कोटिया निवासी शिक्षक रमेश कुमार भी बैसाखियों के सहारे मतदान करने पहुंचे। उन्होंने बताया कि व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं रहने से उन्हें काफी कठिनाई हुई और दूसरों के सहयोग से मतदान केंद्र के अंदर जाना पड़ा। मतदान करने की इच्छा और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के प्रति उनका संकल्प इस परेशानी के बावजूद कमजोर नहीं पड़ा। दिव्यांग मतदाताओं की यह पहल लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी के महत्व को दर्शाती है, वहीं मतदान केंद्रों पर दिव्यांगजनों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी उजागर करती है। मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी दर्ज कराने का माध्यम है। ऐसे में दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं को बिना परेशानी मतदान कराने के लिए व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता जरूरी है। मोतीपुर में कुल 53 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान के दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी मो. खालिद दंडाधिकारी के रूप में तैनात रहे। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी अवर निरीक्षक बिट्टू कुमार, श्वेता कुमारी सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने संभाली।




